सोमवार, 16 जून 2008

नई खेती

मैं किसान हूँ
आसमान में धान बो रहा हूँ

कुछ लोग कह रहे हैं कि
पगले! आसमान में धान नहीं जमा
करता

मैं कहता हूँ गेगले गोगले पगले !
अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है
तो आसमान में धान भी जम सकता है
और अब तो दोनों में से कोई एक होकर रहेगा
या तो ज़मीन से भगवान उखड़ेगा
या आसमान में धान जमेगा।
------------- विद्रोही

3 टिप्‍पणियां:

आशीष कुमार 'अंशु' ने कहा…

बहूत सुन्दर

shaffkat ने कहा…

ALLAMA IQBAL KA KALAM LIKH JATA HOON
teri duniya me mein mehkoom aur mazloom
meri duniya mein teri badhshahi

सतीश पंचम ने कहा…

बहुत सुन्दर।